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क्या #WHO ने 150 देशों में पतंजलि की कोरोनिल बेचने की इजाजत दी?
योग गुरु रामदेव के पतंजलि ग्रुप ने कोरोना बीमारी को लेकर बनाई अपनी विवादास्पद दवाई कोरोनिल को दोबारा से बीते शुक्रवार को लॉन्च किया. इस रीलॉन्च में भारत सरकार के दो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी शामिल हुए.
पिछली बार जब पतंजलि ने कोरोनिल को लॉन्च किया गया था तब रामदेव ने कई दावे किए, लेकिन उनके दावों को न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी रिपोर्ट में गलत पाया था. इस बार भी लॉन्च के दौरान ऐसा ही दावा किया गया है जो सवालों के घेरे में है.
दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में जिस स्टेज पर भारत के दो प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री बैठे थे, जिसमें से एक देश के स्वास्थ्य मंत्री भी थे और लम्बे समय तक चिकित्सक के तौर पर प्रैक्टिस कर चुके हैं. स्टेज के ठीक पीछे एक पोस्टर लगा था, जिस पर कोरोनिल से जुड़े दावे लिखे हुए थे.
कई दावों के साथ एक दावा यह था कि कोरोनिल फर्स्ट एविडेंस बेस्ड मेडिसिन फॉर कोविड-19 और सीओपीपी- डब्ल्यूएचओ जीएमपी सर्टिफाइड है. यानी कि ये दवाई भारत की पहली तथ्यों आधारित कोरोना की दवाई और साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे गुड मेनुफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) को लेकर मान्यता दी है.
ऐसा नहीं था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन वाली बात सिर्फ पोस्टर पर लिखी गई, बल्कि यह बात खुद पतंजलि के प्रमुख रामदेव से कई पत्रकारों ने अपने इंटरव्यू के दौरान भी पूछा और खबरें भी इस दावे से प्रकाशित की गई कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोनिल को परमिशन दिया है.
टीवी 9 भारतवर्ष ने लिखा, ‘‘योग गुरु रामदेव ने दुनिया के 158 देशों के लिए कोरोनावायरस की ‘प्रमाणिक दवा’ लॉन्च की है. यह दवा नई दवा साक्ष्यों पर आधारित है. पतंजलि की नई कोविड -19 दिव्य कोरोनिल टैबलेट सीओपीपी-डब्ल्यूएचओ जीएमपी प्रमाणित (CoPP-WHO GMP certified) और पहली साक्ष्य आधारित दवा है.’’
इसके अलावा न्यूज़-नेशन के प्राइम टाइम एंकर दीपक चौरसिया ने स्वामी रामदेव का इंटरव्यू के दौरान कहा, ''आज बाबा रामदेव ने सिद्ध कर दिया है कि वे जो कहते हैं वो करते हैं. उन्होंने कोरोनिल के बारे में बात कही थी तो इस बात पर बड़ा विवाद उठा था कि उनकी कोरोनिल किट क्या कोरोना का कारगर इलाज है. लेकिन आज इस पर डब्ल्यूएचओ की सहमति मिल चुकी है.''
इंट्रो के बाद रामदेव से दीपक चौरसिया ने सवाल किया कि सबसे पहले मैं जानना चाहता हूं कि डब्ल्यूएचओ की इस स्वीकृति का मतलब क्या है. अंतरराष्ट्रीय मायनों में?
इस सवाल का जवाब रामदेव देते हुए कहते हैं, ‘‘यह भारत के लिए गौरव की बात है कि कोरोना की दुनिया में पहली दवाई पतंजलि ने बनाई है. यह बात पतंजलि के कोई ब्रांड की बात नहीं है. योग आयुर्वेद जो भारत की सांस्कृतिक ज्ञान विरासत है, अपने पूर्वजों का ज्ञान, उसी ज्ञान को अनुसंधान के पंख लगाकर हमने डीसीजीआई से परमिशन ली. डब्ल्यूएचओ की एक पूरी की पूरी टीम आई थी उसने 150 से ज़्यादा देशों में हमें अब करोनिल से लेकर के सौ से ज़्यादा गिलोय, आवला एलोवेरा से लेकर तमाम तरह के च्यवनप्राश को लेकर, वो प्रोडक्ट जो हम यहां पर साइंटिफिक रिसर्च के जरिए एविडेंस के साथ बनाते हैं, उसको बेचने का परमिशन दे दी है.’’
इस इंटरव्यू के दौरान दीपक चौरसिया बार-बार दावा करते हैं कि डब्ल्यूएचओ से पतंजलि को अनुमति मिली है. डब्ल्यूएचओ से इसको अनुमति मिली है या नहीं इसको लेकर रामदेव कोई साफ जवाब नहीं देते हैं. ना हां कहते है और ना ही कहते हैं.
न्यूज़ नेशन ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि पतंजलि कोरोनिल को डब्लूएचओ से भी अप्रूवल मिल गया है.
आजतक ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ‘‘आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि कोरोनिल का इस्तेमाल पहले से लोग कर रहे थे, लेकिन अब डीजीसीए के बाद हमें डब्लूएचओ से अप्रूवल मिल गया है. इसके बाद हम अब आधिकारिक रूप से कोरोनिल का निर्यात कर सकते हैं, हमने वैज्ञानिक पद्धति से कोरोनिल का रिसर्च किया.’’
यही नहीं इंडिया टीवी के प्रमुख रजत शर्मा ने बकायदा एक ब्लॉग लिखा जिसका शीर्षक है, कोरोना की दूसरी लहर की आहट, रामदेव की कोरोनिल को मिली WHO की मान्यता.’’
शर्मा अपने लेख में दो बातें कहते हैं. एक जगह रजत शर्मा लिखते हैं, ‘‘स्वामी रामदेव ने कहा- WHO ने इसे GMP यानी ‘गुड मैनुफैक्चरिंग प्रैक्टिस’ का सर्टिफिकेट दिया है. जिन लोगों ने कोरोनिल को लेकर सवाल उठाए थे, अब उन्हें जवाब मिल गया होगा.’’ दूसरी जगह वे लिखते हैं, ‘‘पतंजलि के एक बयान में कहा गया है, ‘कोरोनिल को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के आयुष खंड से WHO की प्रमाणन योजना के तहत फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट (CoPP) का प्रमाण पत्र मिला है.’’ यह लेख रजत शर्मा ने रजत शर्मा डॉट कॉम पर लिखा है.
इसके अलावा रजत शर्मा के नेतृत्व वाली इंडिया टीवी ने भी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का इंटरव्यू करते हुए लिखा कि डब्ल्यूएचओ से सेटिस्फाइड दवा का एलान.
न्यूज़ 18 हिंदी पर भी बात करते हुए बाबा रामदेव ने दावा किया कि 150 देशों में बेचने की इजाजत मिल गई. इस बातचीत के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया कि डब्ल्यूएचओ की टीम जांच के लिए आई थी.
दीपक चौरसिया की तरह ही किशोर अजवाणी अपने इंटरव्यू के शुरुआत में दावा करते हैं कि डब्ल्यूएचओ से कोरोनिल दवाई को मान्यता मिल गई है.
न्यूज़ 18 ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के इंटरव्यू का कई वीडिओ साझा किया जिसमें एक वीडियो में दावा किया गया कि बाबा Ramdev की Corona दवा को WHO से मिली मोहर, कहा - यह कॉरोनिल का नया अवतार है.
कार्यक्रम के दौरान लगे पोस्टर में कोरोनिल की लिखी विशेषता और अलग-अलग चैनल्स को दिए इंटरव्यू में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के दावे और चैनलों द्वारा उसको प्रकाशित करने में जो मुख्य बातें सामने आई वो कुछ यूं थी.
1. कोरोनिल को डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिल गई है. ये बात खुद रामदेव या बालकृष्ण ने नहीं कही लेकिन उनके पोस्टर पर लिखा गया है और साथ ही कई पत्रकारों ने यह बात इंटरव्यू के दौरान की. कई वेबसाइड पर इसी को लेकर खबर प्रकाशित की गई.
2. डब्ल्यूएचओ की टीम जिस जगह पर करोनिल दवाई बनती है वहां विजिट किया.
3. डब्ल्यूएचओ ने अब पतंजलि को कोरोनिल को 150 से ज़्यादा देशों में बेचने की इजाजत दे दी है. किसी संस्थान ने 154 देश लिखा तो किसी ने 158. यह बात खुद ही बाबा रामदेव ने भी कई इंटरव्यू में स्वीकार किया.
न्यूजलॉन्ड्री ने इसको लेकर डब्लूएचओ को मेल से सवाल भेजा. हमने उनसे पूछा कि क्या डब्ल्यूएचओ ने कोरोनिल को जीएमसी की मान्यता दी है. इसको लेकर जो कागजी कार्रवाई हुई वो आप हमसे साझा कर सकते है. यह मान्यता कब दी गई. क्या डब्ल्यूएचओ की टीम खुद पतंजलि के रिसर्च सेंटर में आई थी.
इन तमाम सवालों के जवाब में डब्ल्यूएचओ के मीडिया विभाग की पदाधिकारी शर्मिला शर्मा ने हमे बताया, ''डब्ल्यूएचओ ने कोविड 19 के उपचार के लिए किसी भी पारंपरिक दवा की प्रभावशीलता की समीक्षा या प्रमाणित नहीं किया है. गुड मेनुफेक्चरिंग प्रैक्टिस ( जीएमपी ) का प्रमाण पत्र आमतौर पर डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए राष्ट्रीय दवा नियामक द्वारा जारी किया जाता है.''
यानी जिसका दावा पतंजलि, बाबा रामदेव या आचार्य बालकृष्ण कर रहे थे उसमें से किसी भी चीज की परमिशन ने डब्ल्यूएचओ ने नहीं दी है. बढ़ते विवाद को देखते हुए पतंजलि का नाम लिए बगैर डब्ल्यूएचओ ने एक टवीट किया जिसमें लिखा कि डब्ल्यूएचओ किसी भी पारंपरिक दवाई की मान्यता कोविड 19 के लिए नहीं दी है.
खुद आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीट करके जानकारी दी कि यह स्पष्ट है कि डब्लूएचओ किसी भी ड्रग्स को स्वीकार या अस्वीकृत नहीं करता है. कोरोनिल के लिए हमारा डब्ल्यूएचओ जीएमपी /सीओपीपी प्रमाण पत्र डीसीजीआई, भारत सरकार द्वारा जारी किया गया है.
हालांकि तब तक यह बात मीडिया संस्थानों के जरिए दर्शकों तक पहुंचा दी गई थी कि डब्ल्यूएचओ से कोरोनिल को मान्यता मिल चुकी है.
आखिर क्या होता है जीएमपी, कौन देता है इसकी मान्यता
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गुड मेनुफेक्चरिंग प्रैक्टिस यानी जीएमपी का प्रमाण पत्र कौन देता है. इसमें डब्ल्यूएचओ की क्या भूमिका है.
डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट को माने तो गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस, जिसे जीएमपी या सीजीएमपी (करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) के रूप में जाना जाता है. यह गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त होने का एक माध्यम है जो सुनिश्चित करता है कि दवाई के निर्माण में औषधीय उत्पादों का उपयोग ठीक से हुआ या नहीं. इस मानक के जरिए किसी कंपनी के दवाई निर्माण उचित गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है.
जीएमपी प्रमाण पत्र को लेकर डब्ल्यूएचओ ने एक मानक बनाया हुआ है. जिसको इससे जुड़े देश फॉलो करते हैं. जैसा की न्यूज़लॉन्ड्री को दिए जवाब में डब्ल्यूएचओ के मीडिया विभाग की पदाधिकारी शर्मिला शर्मा ने हमे बताया, "डब्ल्यूएचओ कोविड-19 से जुड़ी किसी परंपरागत दवाई के प्रभाव का का प्रमाणीकरण नहीं करता. गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) का प्रमाण पत्र आमतौर पर राष्ट्रीय दवा नियामक द्वारा जारी किया जाता है जो अक्सर डब्ल्यूएचओ के दिशा निर्देशों के आधार पर होता है."
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रवि वनखेड़कर से न्यूज़लॉन्ड्री ने जीएमपी को लेकर सवाल किया. उन्होंने बताया, ‘‘जीएमपी का किसी दवाई का किसी बीमारी पर असरदार या बेअसरदार होने का कोई संबंध नहीं होता. सामान्य तौर पर अगर जीएमपी को समझने की कोशिश करें कि भारत के कपड़ा फैक्ट्री या अन्य किसी भी फैक्ट्री में एक नियम है कि वहां 18 साल से कम उम्र के किसी भी शख्स को काम करने की अनुमति नहीं होता या एक बंद कमरे में बैठकर लोग काम नहीं कर सकते हैं. यह बस एक नियम है. समय पर उनके वेतन मिलेगा, उनकी दवाई का ईलाज होगा. इसका सिर्फ दवाई से भी लेना देना नहीं है.’’
150 देशों में कोरोनिल बेचने की इजाजत?
बाबा रामदेव ने दावा किया कि डब्लूएचओ ने पतंजलि को 150 देशों में दवाई बेचने की इजाजत दी है. कई मीडिया संस्थानों ने इसको लेकर खबर भी बनाया.
न्यूजलॉन्ड्री ने कोरोनिल को 150 देशों में बेचने को लेकर जब डब्ल्यूएचओ से सवाल किया था तो उन्होंने अपने पुराने जवाब को दोहराया कि उन्होंने किसी पारंपरिक दवाई को कोविड-19 के लिए इजाजत नहीं दी है. यानी जब डब्लूएचओ ने कोरोनिल की प्रमाणिकता को लेकर कोई प्रमाण पत्र ही जारी नहीं किया तो ऐसे में उसे बेचने की इजाजत देने का सवाल ही नहीं उठता.
रावदेव और अलग-अलग चैनलों द्वारा डब्ल्यूएचओ से दवाई बेचने के परमिशन के सवाल पर रवि वनखेड़कर कहते हैं, ‘‘किसी भी दवाई को बेचने के लिए डब्ल्यूएचओ महीनों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग देशों में जॉइंट ट्रायल करता है. ट्रायल करने के बाद जाकर अपनी गाइडलाइन्स बनाता है. कोरोना के संदर्भ में ही अलग बात करें तो उसने सोलिड्रेटरी ट्रायल बीते एक साल से चलाया. अभी तक सिर्फ एक ही दवाई को डब्ल्यूएचओ ने परमिशन दी है वो है कर्टिकोस्टीरॉड्स. बाकी अलग-अलग देशों के ड्रग कंट्रोलर अपने-अपने स्तर पर इमरजेंसी लेवल पर ट्रीटमेंट अप्रूवल करती है. अभी तक तो कोई दवाई नहीं है इसलिए इमरजेंसी की स्थिति में दवा की अप्रूवल होती है. लेकिन ऐसी कोई भी परमिशन बाबाजी की दवाई को नहीं मिली है. किसी भी देश से.’’
क्या डब्ल्यूएचओ ने कोरोनिल को अन्य देशों में बेचने की इजाजत दी है. ये सवाल जब हमने पतंजलि के पीआरओ तिजारवाला से किया. तो उन्होंने हमें सवाल मैसेज करने लिए कहा. हमने उन्हें सवालों की लिस्ट भेज दी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.
'स्वास्थ्य मंत्री का कोरोनिल के लॉन्च में जाना गलत'
कोरोनिल को लेकर दावे पर तो सवाल खड़े हो ही रहे हैं साथ में इसके लॉन्च में स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन के शामिल होने, पतंजलि और उसके प्रमुख रामदेव की तारीफ करने को लेकर भी उनपर सवाल खड़े हो रहे हैं. हर्षवर्धन ना इस कार्यक्रम में सिर्फ शामिल हुए थे बल्कि इसकी अध्यक्षता भी की थी.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जाया लाल ने न्यूजलॉन्ड्री से बात करते हुए डॉक्टर हर्षवर्धन के कार्यक्रम में जाने की आलोचना की. उन्होंने कहा, ''मेडिकल काउन्सिल ऑफ इंडिया ने अपने नियमों में साफ-साफ लिखा है कि कोई भी डॉक्टर किसी भी दवाई को प्रोमोट नहीं कर सकता है. हर्षवर्धन खुद एक डॉक्टर हैं वो कैसे इस कार्यक्रम में गए. यह एथिक्स के खिलाफ है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, नेशनल मेडकल कमीशन को पत्र लिख रहे है कि इसको लेकर हर्षवर्धन जी से सफाई ली जाए. वो कैसे एक ऐसे दवाई को प्रोमोट कर सकते हैं. यह बेहद गलत है.''
पतंजलि के कोरोनिल के लॉन्च में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के पहुंचने के सवाल पर रवि वनखेड़कर कहते हैं, ‘‘यह बिलकुल गलत बात है. वो खुद पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टर हैं. डब्ल्यूएचओ के गवनिंग काउंसिल के प्रमुख है. उनके बैठने से दवाई को विश्वसनीयता मिलती है. देश की जनता टीवी पर देखेंगी कि केंद्रीय मंत्री बैठे हुए हैं तो सब ठीक ही होगा. ऐसे में इस देश में लोगों के स्वास्थ्य को क्या होने वाला है. यह गलत है. एक डॉक्टर के लिए कॉर्ड ऑफ़ एथिक्स है कि वो किसी भी प्राइवेट कंपनी के साथ नहीं जुड़ सकता है. किसी भी दवाई के लॉन्च में आप नहीं जाएंगे.’’
जब कोरोनिल पहले लॉन्च हुआ था तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इसका विरोध किया था. शुक्रवार को दवाई लॉन्च के दौरान बाबा रामदेव ने उन तमाम लोगों को निशाने पर लिया जो दवाई की आलोचना कर चुके हैं. आखिर क्यों कोरोनिल की आलोचना हो रही है.
इस सवाल के जवाब में रवि कहते हैं, ‘‘बाबा रामदेव की हर शहर में हर गली में बड़ी-बड़ी दुकाने, मॉल्स हैं. हम उनकी किस दवाई या शैंपू या ताकत बढ़ने वाली दवाई का विरोध करते रहे हैं. दरअसल यह डर हमें अपने लिए नहीं है. मान लीजिए आपको कोरोना हो गया. आप इस भ्रम में है कि कोरोनिल खाने से कोरोना ठीक हो जाएगा. ऐसे में आपकी बीमारी ज़्यादा हो जाएगी और आईसीईयू में जाकर आपकी मौत हो जाएगी. तो इसलिए यह भ्रम जानलेवा हो सकता है इसलिए हम इसका विरोध करते हैं.’’
योग गुरु रामदेव के पतंजलि ग्रुप ने कोरोना बीमारी को लेकर बनाई अपनी विवादास्पद दवाई कोरोनिल को दोबारा से बीते शुक्रवार को लॉन्च किया. इस रीलॉन्च में भारत सरकार के दो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी शामिल हुए.
पिछली बार जब पतंजलि ने कोरोनिल को लॉन्च किया गया था तब रामदेव ने कई दावे किए, लेकिन उनके दावों को न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी रिपोर्ट में गलत पाया था. इस बार भी लॉन्च के दौरान ऐसा ही दावा किया गया है जो सवालों के घेरे में है.
दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में जिस स्टेज पर भारत के दो प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री बैठे थे, जिसमें से एक देश के स्वास्थ्य मंत्री भी थे और लम्बे समय तक चिकित्सक के तौर पर प्रैक्टिस कर चुके हैं. स्टेज के ठीक पीछे एक पोस्टर लगा था, जिस पर कोरोनिल से जुड़े दावे लिखे हुए थे.
कई दावों के साथ एक दावा यह था कि कोरोनिल फर्स्ट एविडेंस बेस्ड मेडिसिन फॉर कोविड-19 और सीओपीपी- डब्ल्यूएचओ जीएमपी सर्टिफाइड है. यानी कि ये दवाई भारत की पहली तथ्यों आधारित कोरोना की दवाई और साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे गुड मेनुफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) को लेकर मान्यता दी है.
ऐसा नहीं था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन वाली बात सिर्फ पोस्टर पर लिखी गई, बल्कि यह बात खुद पतंजलि के प्रमुख रामदेव से कई पत्रकारों ने अपने इंटरव्यू के दौरान भी पूछा और खबरें भी इस दावे से प्रकाशित की गई कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोनिल को परमिशन दिया है.
टीवी 9 भारतवर्ष ने लिखा, ‘‘योग गुरु रामदेव ने दुनिया के 158 देशों के लिए कोरोनावायरस की ‘प्रमाणिक दवा’ लॉन्च की है. यह दवा नई दवा साक्ष्यों पर आधारित है. पतंजलि की नई कोविड -19 दिव्य कोरोनिल टैबलेट सीओपीपी-डब्ल्यूएचओ जीएमपी प्रमाणित (CoPP-WHO GMP certified) और पहली साक्ष्य आधारित दवा है.’’
इसके अलावा न्यूज़-नेशन के प्राइम टाइम एंकर दीपक चौरसिया ने स्वामी रामदेव का इंटरव्यू के दौरान कहा, ''आज बाबा रामदेव ने सिद्ध कर दिया है कि वे जो कहते हैं वो करते हैं. उन्होंने कोरोनिल के बारे में बात कही थी तो इस बात पर बड़ा विवाद उठा था कि उनकी कोरोनिल किट क्या कोरोना का कारगर इलाज है. लेकिन आज इस पर डब्ल्यूएचओ की सहमति मिल चुकी है.''
इंट्रो के बाद रामदेव से दीपक चौरसिया ने सवाल किया कि सबसे पहले मैं जानना चाहता हूं कि डब्ल्यूएचओ की इस स्वीकृति का मतलब क्या है. अंतरराष्ट्रीय मायनों में?
इस सवाल का जवाब रामदेव देते हुए कहते हैं, ‘‘यह भारत के लिए गौरव की बात है कि कोरोना की दुनिया में पहली दवाई पतंजलि ने बनाई है. यह बात पतंजलि के कोई ब्रांड की बात नहीं है. योग आयुर्वेद जो भारत की सांस्कृतिक ज्ञान विरासत है, अपने पूर्वजों का ज्ञान, उसी ज्ञान को अनुसंधान के पंख लगाकर हमने डीसीजीआई से परमिशन ली. डब्ल्यूएचओ की एक पूरी की पूरी टीम आई थी उसने 150 से ज़्यादा देशों में हमें अब करोनिल से लेकर के सौ से ज़्यादा गिलोय, आवला एलोवेरा से लेकर तमाम तरह के च्यवनप्राश को लेकर, वो प्रोडक्ट जो हम यहां पर साइंटिफिक रिसर्च के जरिए एविडेंस के साथ बनाते हैं, उसको बेचने का परमिशन दे दी है.’’
इस इंटरव्यू के दौरान दीपक चौरसिया बार-बार दावा करते हैं कि डब्ल्यूएचओ से पतंजलि को अनुमति मिली है. डब्ल्यूएचओ से इसको अनुमति मिली है या नहीं इसको लेकर रामदेव कोई साफ जवाब नहीं देते हैं. ना हां कहते है और ना ही कहते हैं.
न्यूज़ नेशन ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि पतंजलि कोरोनिल को डब्लूएचओ से भी अप्रूवल मिल गया है.
आजतक ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ‘‘आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि कोरोनिल का इस्तेमाल पहले से लोग कर रहे थे, लेकिन अब डीजीसीए के बाद हमें डब्लूएचओ से अप्रूवल मिल गया है. इसके बाद हम अब आधिकारिक रूप से कोरोनिल का निर्यात कर सकते हैं, हमने वैज्ञानिक पद्धति से कोरोनिल का रिसर्च किया.’’
यही नहीं इंडिया टीवी के प्रमुख रजत शर्मा ने बकायदा एक ब्लॉग लिखा जिसका शीर्षक है, कोरोना की दूसरी लहर की आहट, रामदेव की कोरोनिल को मिली WHO की मान्यता.’’
शर्मा अपने लेख में दो बातें कहते हैं. एक जगह रजत शर्मा लिखते हैं, ‘‘स्वामी रामदेव ने कहा- WHO ने इसे GMP यानी ‘गुड मैनुफैक्चरिंग प्रैक्टिस’ का सर्टिफिकेट दिया है. जिन लोगों ने कोरोनिल को लेकर सवाल उठाए थे, अब उन्हें जवाब मिल गया होगा.’’ दूसरी जगह वे लिखते हैं, ‘‘पतंजलि के एक बयान में कहा गया है, ‘कोरोनिल को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के आयुष खंड से WHO की प्रमाणन योजना के तहत फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट (CoPP) का प्रमाण पत्र मिला है.’’ यह लेख रजत शर्मा ने रजत शर्मा डॉट कॉम पर लिखा है.
इसके अलावा रजत शर्मा के नेतृत्व वाली इंडिया टीवी ने भी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का इंटरव्यू करते हुए लिखा कि डब्ल्यूएचओ से सेटिस्फाइड दवा का एलान.
न्यूज़ 18 हिंदी पर भी बात करते हुए बाबा रामदेव ने दावा किया कि 150 देशों में बेचने की इजाजत मिल गई. इस बातचीत के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया कि डब्ल्यूएचओ की टीम जांच के लिए आई थी.
दीपक चौरसिया की तरह ही किशोर अजवाणी अपने इंटरव्यू के शुरुआत में दावा करते हैं कि डब्ल्यूएचओ से कोरोनिल दवाई को मान्यता मिल गई है.
न्यूज़ 18 ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के इंटरव्यू का कई वीडिओ साझा किया जिसमें एक वीडियो में दावा किया गया कि बाबा Ramdev की Corona दवा को WHO से मिली मोहर, कहा - यह कॉरोनिल का नया अवतार है.
कार्यक्रम के दौरान लगे पोस्टर में कोरोनिल की लिखी विशेषता और अलग-अलग चैनल्स को दिए इंटरव्यू में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के दावे और चैनलों द्वारा उसको प्रकाशित करने में जो मुख्य बातें सामने आई वो कुछ यूं थी.
1. कोरोनिल को डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिल गई है. ये बात खुद रामदेव या बालकृष्ण ने नहीं कही लेकिन उनके पोस्टर पर लिखा गया है और साथ ही कई पत्रकारों ने यह बात इंटरव्यू के दौरान की. कई वेबसाइड पर इसी को लेकर खबर प्रकाशित की गई.
2. डब्ल्यूएचओ की टीम जिस जगह पर करोनिल दवाई बनती है वहां विजिट किया.
3. डब्ल्यूएचओ ने अब पतंजलि को कोरोनिल को 150 से ज़्यादा देशों में बेचने की इजाजत दे दी है. किसी संस्थान ने 154 देश लिखा तो किसी ने 158. यह बात खुद ही बाबा रामदेव ने भी कई इंटरव्यू में स्वीकार किया.
न्यूजलॉन्ड्री ने इसको लेकर डब्लूएचओ को मेल से सवाल भेजा. हमने उनसे पूछा कि क्या डब्ल्यूएचओ ने कोरोनिल को जीएमसी की मान्यता दी है. इसको लेकर जो कागजी कार्रवाई हुई वो आप हमसे साझा कर सकते है. यह मान्यता कब दी गई. क्या डब्ल्यूएचओ की टीम खुद पतंजलि के रिसर्च सेंटर में आई थी.
इन तमाम सवालों के जवाब में डब्ल्यूएचओ के मीडिया विभाग की पदाधिकारी शर्मिला शर्मा ने हमे बताया, ''डब्ल्यूएचओ ने कोविड 19 के उपचार के लिए किसी भी पारंपरिक दवा की प्रभावशीलता की समीक्षा या प्रमाणित नहीं किया है. गुड मेनुफेक्चरिंग प्रैक्टिस ( जीएमपी ) का प्रमाण पत्र आमतौर पर डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए राष्ट्रीय दवा नियामक द्वारा जारी किया जाता है.''
यानी जिसका दावा पतंजलि, बाबा रामदेव या आचार्य बालकृष्ण कर रहे थे उसमें से किसी भी चीज की परमिशन ने डब्ल्यूएचओ ने नहीं दी है. बढ़ते विवाद को देखते हुए पतंजलि का नाम लिए बगैर डब्ल्यूएचओ ने एक टवीट किया जिसमें लिखा कि डब्ल्यूएचओ किसी भी पारंपरिक दवाई की मान्यता कोविड 19 के लिए नहीं दी है.
खुद आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीट करके जानकारी दी कि यह स्पष्ट है कि डब्लूएचओ किसी भी ड्रग्स को स्वीकार या अस्वीकृत नहीं करता है. कोरोनिल के लिए हमारा डब्ल्यूएचओ जीएमपी /सीओपीपी प्रमाण पत्र डीसीजीआई, भारत सरकार द्वारा जारी किया गया है.
हालांकि तब तक यह बात मीडिया संस्थानों के जरिए दर्शकों तक पहुंचा दी गई थी कि डब्ल्यूएचओ से कोरोनिल को मान्यता मिल चुकी है.
आखिर क्या होता है जीएमपी, कौन देता है इसकी मान्यता
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गुड मेनुफेक्चरिंग प्रैक्टिस यानी जीएमपी का प्रमाण पत्र कौन देता है. इसमें डब्ल्यूएचओ की क्या भूमिका है.
डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट को माने तो गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस, जिसे जीएमपी या सीजीएमपी (करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) के रूप में जाना जाता है. यह गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त होने का एक माध्यम है जो सुनिश्चित करता है कि दवाई के निर्माण में औषधीय उत्पादों का उपयोग ठीक से हुआ या नहीं. इस मानक के जरिए किसी कंपनी के दवाई निर्माण उचित गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है.
जीएमपी प्रमाण पत्र को लेकर डब्ल्यूएचओ ने एक मानक बनाया हुआ है. जिसको इससे जुड़े देश फॉलो करते हैं. जैसा की न्यूज़लॉन्ड्री को दिए जवाब में डब्ल्यूएचओ के मीडिया विभाग की पदाधिकारी शर्मिला शर्मा ने हमे बताया, "डब्ल्यूएचओ कोविड-19 से जुड़ी किसी परंपरागत दवाई के प्रभाव का का प्रमाणीकरण नहीं करता. गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) का प्रमाण पत्र आमतौर पर राष्ट्रीय दवा नियामक द्वारा जारी किया जाता है जो अक्सर डब्ल्यूएचओ के दिशा निर्देशों के आधार पर होता है."
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रवि वनखेड़कर से न्यूज़लॉन्ड्री ने जीएमपी को लेकर सवाल किया. उन्होंने बताया, ‘‘जीएमपी का किसी दवाई का किसी बीमारी पर असरदार या बेअसरदार होने का कोई संबंध नहीं होता. सामान्य तौर पर अगर जीएमपी को समझने की कोशिश करें कि भारत के कपड़ा फैक्ट्री या अन्य किसी भी फैक्ट्री में एक नियम है कि वहां 18 साल से कम उम्र के किसी भी शख्स को काम करने की अनुमति नहीं होता या एक बंद कमरे में बैठकर लोग काम नहीं कर सकते हैं. यह बस एक नियम है. समय पर उनके वेतन मिलेगा, उनकी दवाई का ईलाज होगा. इसका सिर्फ दवाई से भी लेना देना नहीं है.’’
150 देशों में कोरोनिल बेचने की इजाजत?
बाबा रामदेव ने दावा किया कि डब्लूएचओ ने पतंजलि को 150 देशों में दवाई बेचने की इजाजत दी है. कई मीडिया संस्थानों ने इसको लेकर खबर भी बनाया.
न्यूजलॉन्ड्री ने कोरोनिल को 150 देशों में बेचने को लेकर जब डब्ल्यूएचओ से सवाल किया था तो उन्होंने अपने पुराने जवाब को दोहराया कि उन्होंने किसी पारंपरिक दवाई को कोविड-19 के लिए इजाजत नहीं दी है. यानी जब डब्लूएचओ ने कोरोनिल की प्रमाणिकता को लेकर कोई प्रमाण पत्र ही जारी नहीं किया तो ऐसे में उसे बेचने की इजाजत देने का सवाल ही नहीं उठता.
रावदेव और अलग-अलग चैनलों द्वारा डब्ल्यूएचओ से दवाई बेचने के परमिशन के सवाल पर रवि वनखेड़कर कहते हैं, ‘‘किसी भी दवाई को बेचने के लिए डब्ल्यूएचओ महीनों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग देशों में जॉइंट ट्रायल करता है. ट्रायल करने के बाद जाकर अपनी गाइडलाइन्स बनाता है. कोरोना के संदर्भ में ही अलग बात करें तो उसने सोलिड्रेटरी ट्रायल बीते एक साल से चलाया. अभी तक सिर्फ एक ही दवाई को डब्ल्यूएचओ ने परमिशन दी है वो है कर्टिकोस्टीरॉड्स. बाकी अलग-अलग देशों के ड्रग कंट्रोलर अपने-अपने स्तर पर इमरजेंसी लेवल पर ट्रीटमेंट अप्रूवल करती है. अभी तक तो कोई दवाई नहीं है इसलिए इमरजेंसी की स्थिति में दवा की अप्रूवल होती है. लेकिन ऐसी कोई भी परमिशन बाबाजी की दवाई को नहीं मिली है. किसी भी देश से.’’
क्या डब्ल्यूएचओ ने कोरोनिल को अन्य देशों में बेचने की इजाजत दी है. ये सवाल जब हमने पतंजलि के पीआरओ तिजारवाला से किया. तो उन्होंने हमें सवाल मैसेज करने लिए कहा. हमने उन्हें सवालों की लिस्ट भेज दी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.
'स्वास्थ्य मंत्री का कोरोनिल के लॉन्च में जाना गलत'
कोरोनिल को लेकर दावे पर तो सवाल खड़े हो ही रहे हैं साथ में इसके लॉन्च में स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन के शामिल होने, पतंजलि और उसके प्रमुख रामदेव की तारीफ करने को लेकर भी उनपर सवाल खड़े हो रहे हैं. हर्षवर्धन ना इस कार्यक्रम में सिर्फ शामिल हुए थे बल्कि इसकी अध्यक्षता भी की थी.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जाया लाल ने न्यूजलॉन्ड्री से बात करते हुए डॉक्टर हर्षवर्धन के कार्यक्रम में जाने की आलोचना की. उन्होंने कहा, ''मेडिकल काउन्सिल ऑफ इंडिया ने अपने नियमों में साफ-साफ लिखा है कि कोई भी डॉक्टर किसी भी दवाई को प्रोमोट नहीं कर सकता है. हर्षवर्धन खुद एक डॉक्टर हैं वो कैसे इस कार्यक्रम में गए. यह एथिक्स के खिलाफ है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, नेशनल मेडकल कमीशन को पत्र लिख रहे है कि इसको लेकर हर्षवर्धन जी से सफाई ली जाए. वो कैसे एक ऐसे दवाई को प्रोमोट कर सकते हैं. यह बेहद गलत है.''
पतंजलि के कोरोनिल के लॉन्च में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के पहुंचने के सवाल पर रवि वनखेड़कर कहते हैं, ‘‘यह बिलकुल गलत बात है. वो खुद पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टर हैं. डब्ल्यूएचओ के गवनिंग काउंसिल के प्रमुख है. उनके बैठने से दवाई को विश्वसनीयता मिलती है. देश की जनता टीवी पर देखेंगी कि केंद्रीय मंत्री बैठे हुए हैं तो सब ठीक ही होगा. ऐसे में इस देश में लोगों के स्वास्थ्य को क्या होने वाला है. यह गलत है. एक डॉक्टर के लिए कॉर्ड ऑफ़ एथिक्स है कि वो किसी भी प्राइवेट कंपनी के साथ नहीं जुड़ सकता है. किसी भी दवाई के लॉन्च में आप नहीं जाएंगे.’’
जब कोरोनिल पहले लॉन्च हुआ था तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इसका विरोध किया था. शुक्रवार को दवाई लॉन्च के दौरान बाबा रामदेव ने उन तमाम लोगों को निशाने पर लिया जो दवाई की आलोचना कर चुके हैं. आखिर क्यों कोरोनिल की आलोचना हो रही है.
इस सवाल के जवाब में रवि कहते हैं, ‘‘बाबा रामदेव की हर शहर में हर गली में बड़ी-बड़ी दुकाने, मॉल्स हैं. हम उनकी किस दवाई या शैंपू या ताकत बढ़ने वाली दवाई का विरोध करते रहे हैं. दरअसल यह डर हमें अपने लिए नहीं है. मान लीजिए आपको कोरोना हो गया. आप इस भ्रम में है कि कोरोनिल खाने से कोरोना ठीक हो जाएगा. ऐसे में आपकी बीमारी ज़्यादा हो जाएगी और आईसीईयू में जाकर आपकी मौत हो जाएगी. तो इसलिए यह भ्रम जानलेवा हो सकता है इसलिए हम इसका विरोध करते हैं.’’
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